कार्तिक 1963 आरंभ व समाप्ति तिथि (कार्तिक मास)
उत्तर भारत (पूर्णिमांत): शुक्रवार, 4 अक्टूबर 1963 – शुक्रवार, 1 नवंबर 1963
अमांत क्षेत्र: शुक्रवार, 18 अक्टूबर 1963 – शनिवार, 16 नवंबर 1963
विष्णु का सर्वाधिक पवित्र मास — कार्तिक स्नान, दामोदर दीप-दान, दीवाली, छठ और तुलसी विवाह।
कार्तिक 1963 एक नज़र में
- कार्तिक शिवरात्रि
- बुध, 16 अक्टू॰
- पूर्णिमा
- शुक्र, 1 नव॰
- अमावस्या
- गुरु, 17 अक्टू॰
- कार्तिक शिवरात्रि
- शुक्र, 15 नव॰
- पूर्णिमा
- शुक्र, 1 नव॰
- अमावस्या
- शनि, 16 नव॰
कार्तिक का महत्व — भगवान विष्णु (दामोदर)
कार्तिक विष्णु का मास है, जो यहाँ दामोदर रूप में पूजे जाते हैं, और इसमें किसी भी अन्य मास से अधिक पर्व हैं — धनतेरस, दीवाली, गोवर्धन, भाई दूज, छठ, तुलसी विवाह और कार्तिक पूर्णिमा। यह प्रकाश का मास है: प्रतिदिन दीप जलाना या प्रवाहित करना (दीप-दान) सर्वोच्च पुण्य माना जाता है, और नदी में भोर-पूर्व कार्तिक स्नान इस मास का मूल अनुशासन है।
कार्तिक के अनुष्ठान
- कार्तिक स्नान — मास भर भोर-पूर्व पवित्र स्नान
- प्रतिदिन दीप-दान (दीप जलाना या प्रवाहित करना)
- प्रति संध्या तुलसी पूजा और एकादशी को तुलसी विवाह
- दामोदर-अष्टकम का पाठ
- दोनों एकादशियों (देवउठनी और कार्तिक) का व्रत
- कार्तिक पूर्णिमा को घाटों पर देव दीपावली
कार्तिक 1963 के प्रमुख दिन
व्रत और तिथियाँ उसी मास-अवधि से निकाली जाती हैं जिसका आप पंचांग मानते हैं — इसलिए दोनों पद्धतियाँ अलग-अलग दी गई हैं।
उत्तर भारत · पूर्णिमांत
शुक्र, 4 अक्टू॰ – शुक्र, 1 नव॰ · 29 दिन
अमांत क्षेत्र
शुक्र, 18 अक्टू॰ – शनि, 16 नव॰ · 30 दिन
मासिक व्रत 1963
कार्तिक 1963 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कार्तिक मास 1963 कब से शुरू है?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में कार्तिक शुक्रवार, 4 अक्टूबर 1963 से शुक्रवार, 1 नवंबर 1963 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह शुक्रवार, 18 अक्टूबर 1963 से शनिवार, 16 नवंबर 1963 तक रहता है।
उत्तर और दक्षिण भारत में कार्तिक की तिथियाँ अलग क्यों हैं?
क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।
कार्तिक 1963 किसे समर्पित है?
कार्तिक विष्णु का मास है, जो यहाँ दामोदर रूप में पूजे जाते हैं, और इसमें किसी भी अन्य मास से अधिक पर्व हैं — धनतेरस, दीवाली, गोवर्धन, भाई दूज, छठ, तुलसी विवाह और कार्तिक पूर्णिमा। यह प्रकाश का मास है: प्रतिदिन दीप जलाना या प्रवाहित करना (दीप-दान) सर्वोच्च पुण्य माना जाता है, और नदी में भोर-पूर्व कार्तिक स्नान इस मास का मूल अनुशासन है।
कार्तिक शिवरात्रि 1963 कब है?
कार्तिक शिवरात्रि 1963 — कार्तिक मास की मासिक शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी) — उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में बुधवार, 16 अक्टूबर 1963 को है। अमांत क्षेत्रों में यह शुक्रवार, 15 नवंबर 1963 को पड़ती है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक और रात्रि-पूजन का विशेष महत्व है।
कार्तिक 1963 कब समाप्त होगा?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में कार्तिक शुक्रवार, 1 नवंबर 1963 को श्रावण पूर्णिमा पर समाप्त होता है। अमांत क्षेत्रों में यह शनिवार, 16 नवंबर 1963 को अमावस्या पर समाप्त होता है।
क्या सावन और श्रावण एक ही मास हैं?
हाँ। कार्तिक मास इस चांद्र मास का संस्कृत नाम है और कार्तिक उसी का प्रचलित हिन्दी रूप। दोनों एक ही अवधि बताते हैं — केवल नाम अलग है, तिथियाँ नहीं।
क्या कार्तिक 1963 अधिक मास है?
हाँ। 1963 में अधिक (मल) मास पड़ने से कार्तिक लगभग दोगुना — 29 दिन — लंबा है।