अंतर्दृष्टि के लिए Varanasi (Kashi), India

आज का पंचांग

मंगलवार, 25 अगस्त 2026. ब्रह्मांड परिवर्तन और स्पष्टता का संदेश दे रहा है। इष्टतम सामंजस्य के लिए अपने कार्यों को चंद्र लय के साथ संरेखित करें।

आज का पंचांग

लाइव
दिनांकमंगलवार, 25 अगस्त 2026
शक संवत1948
विक्रम संवत2083
मासश्रावण
पक्षशुक्ल पक्ष
दिशाशूलउत्तर
तिथिद्वादशी तक 06:21 AM फिर त्रयोदशी
नक्षत्रउत्तर आषाढ़ा तक 10:51 PM फिर श्रवण
योगआयुष्मान तक 07:39 AM
करणबालव तक 06:21 AM
अभिजित मुहूर्त11:34 AM – 12:26 PM
राहु काल03:13 PM – 04:49 PM
यमगण्ड07:11 AM – 08:48 AM
आज का व्रतमंगलवार व्रत

आज का राहु काल

03:13 PM04:49 PM

इस अवधि के दौरान नए वित्तीय उपक्रम शुरू करने या प्रमुख अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने से बचें।

आज का पंचांग

तिथि
द्वादशी
नक्षत्र
उत्तर आषाढ़ा
योग
आयुष्मान
करण
बालव
अभिजित मुहूर्त
11:34 AM
12:26 PM

नए आरंभ के लिए सबसे शुभ समय

शुभ काल

ब्रह्म मुहूर्त
03:59 – 04:47
प्रातः संध्या
05:11 – 05:59
विजय मुहूर्त
15:51 – 16:42
गोधूलि मुहूर्त
18:13 – 18:37
सायाह्न संध्या
18:01 – 18:49
निशीथ मुहूर्त
23:38 – 00:22

दिन विवरण

सूर्योदय
05:35
सूर्यास्त
18:25
चंद्रोदय
16:32
चंद्रास्त
02:49
मध्याह्न
12:00
दिनमान
12h 50m
रात्रिमान
11h 10m
दृक ऋतु
वर्षा
वैदिक ऋतु
वर्षा
दृक अयन
दक्षिणायन
नक्षत्र पाद
2
सूर्य नक्षत्र
मघा · पाद 3

वास और स्थिति

आनंदादि योग
वज्र
चंद्र वास
दक्षिण
राहु वास
पूर्व
अग्नि वास
पृथ्वी
शिव वास
गौरीसमीप
होमाहुति
सूर्य
गंड मूल
निष्क्रिय
भद्रा (विष्टि)
निष्क्रिय

चौघड़िया

8 दिन + 8 रात्रि · हरा = शुभ

दिन
  • रोग05:3507:11
  • उद्वेग07:1108:48
  • चर08:4810:24
  • लाभ10:2412:00
  • अमृत12:0013:36
  • काल13:3615:13
  • शुभ15:1316:49
  • रोग16:4918:25
रात्रि
  • काल18:2519:49
  • शुभ19:4921:13
  • रोग21:1322:36
  • उद्वेग22:3600:00
  • चर00:0001:24
  • लाभ01:2402:48
  • अमृत02:4804:11
  • काल04:1105:35

होरा

24 ग्रह घंटे · प्रत्येक का एक ग्रह स्वामी

मंगल05:3506:39
सूर्य06:3907:43
शुक्र07:4308:48
बुध08:4809:52
चंद्र09:5210:56
शनि10:5612:00
गुरु12:0013:04
मंगल13:0414:08
सूर्य14:0815:13
शुक्र15:1316:17
बुध16:1717:21
चंद्र17:2118:25
शनि18:2519:21
गुरु19:2120:17
मंगल20:1721:13
सूर्य21:1322:08
शुक्र22:0823:04
बुध23:0400:00
चंद्र00:0000:56
शनि00:5601:52
गुरु01:5202:48
मंगल02:4803:43
सूर्य03:4304:39
शुक्र04:3905:35

चंद्रबलम

आज जिन जन्म राशियों के लिए चंद्रबल अनुकूल है

मेषकर्कसिंहवृश्चिकमकरमीन

ताराबलम

आज जिन जन्म नक्षत्रों के लिए तारा अनुकूल है

भरणीरोहिणीमृगशिरापुनर्वसुआश्लेषापूर्व फाल्गुनीहस्तचित्राविशाखाज्येष्ठापूर्व आषाढ़ाश्रवणधनिष्ठापूर्व भाद्रपदारेवती

राशिफल दृष्टिकोण

21 मार्च – 19 अप्रैल

मेष

आज मंगल का प्रभाव आपकी व्यावसायिक महत्वाकांक्षाओं को बल देता है। सहयोगी परियोजनाओं में साहसिक कदम उठाएं।

· भाग्यांक: 7· शक्ति: उच्च
20 अप्रैल – 20 मई

वृषभ

शुक्र भावनात्मक स्थिरता और आर्थिक विकास का समय लाता है। दीर्घकालिक योजना बनाने का उत्तम दिन।

· भाग्यांक: 2· शक्ति: मध्य
21 मई – 20 जून

मिथुन

बुध संचार को प्रभावित करता है। किसी रुकी हुई स्थिति में आज सफलता मिल सकती है।

· भाग्यांक: 5· शक्ति: उच्च
21 जून – 22 जुलाई

कर्क

आज आपकी सहजज्ञान सबसे बड़ी शक्ति है। व्यक्तिगत रिश्तों में तर्क से ज्यादा भावना पर भरोसा करें।

· भाग्यांक: 9· शक्ति: मध्य

पंचांग क्या है?

पंचांग का अर्थ है "पाँच अंग" — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों मिलकर किसी दिन का वैदिक विवरण बनाते हैं, अर्थात् उस दिन सूर्य और चंद्रमा वास्तव में कहाँ स्थित हैं। पारंपरिक मुहूर्त-निर्णय इन्हीं पर आधारित होते हैं।

ग्रेगोरियन कैलेंडर निश्चित 24 घंटे का दिन गिनता है, जबकि पंचांग आकाश का अनुसरण करता है। एक तिथि 19 घंटे की भी हो सकती है और 26 घंटे की भी। नक्षत्र दोपहर में बदल सकता है। यही कारण है कि दो लोग "आज की तिथि" पर असहमत होकर भी दोनों सही हो सकते हैं — वे अलग अंग देख रहे हैं, या अलग शहर का पंचांग।

पाँच अंग और उनका अर्थ

तिथि चंद्र दिवस है — चंद्रमा को सूर्य से 12° आगे बढ़ने में लगा समय। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, शुक्ल और कृष्ण पक्ष में 15-15। व्रत और पर्व तिथि से निर्धारित होते हैं, तारीख से नहीं — इसीलिए दीपावली हर वर्ष अलग तारीख पर पड़ती है।

वार सप्ताह का दिन है, जिसका स्वामी एक ग्रह होता है — रविवार का सूर्य, सोमवार का चंद्र। वार से ही उस दिन का राहु काल और होरा क्रम तय होता है।

नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति बताता है — 27 नक्षत्रों में से चंद्रमा किसमें है। नामकरण, मुहूर्त चयन और दिन के स्वभाव के निर्णय में यही अंग सर्वाधिक प्रयुक्त होता है।

योग सूर्य और चंद्रमा के संयुक्त अंशों से बनता है — कुल 27, जिनमें व्यतीपात और वैधृति जैसे कुछ योग नए आरंभ के लिए वर्जित माने जाते हैं।

करण आधी तिथि है। मास में ग्यारह करण चक्र में आते हैं और छोटे, व्यावहारिक कार्यों के लिए देखे जाते हैं।

आपका शहर पंचांग क्यों बदल देता है

हर अंग सूर्योदय से बँधा है। भारत में पूर्व से पश्चिम तक सूर्योदय में एक घंटे से अधिक का अंतर होता है, इसलिए गुवाहाटी के सूर्योदय पर चल रही तिथि मुंबई के सूर्योदय पर वही हो, यह आवश्यक नहीं — और तब दोनों नगर एक ही व्रत भिन्न दिन कर सकते हैं, दोनों शास्त्रसम्मत।

दो पंचांगों की तुलना करते समय भ्रम का सबसे बड़ा कारण यही है। सामान्य संदर्भ के लिए काशी (वाराणसी) लिया जाता है, किंतु जो आप वास्तव में निर्धारित कर रहे हैं — व्रत, मुहूर्त, पूजा — उसके लिए अपने शहर का पंचांग देखें।

आज का पंचांग कैसे पढ़ें

सबसे पहले तिथि और उसका समाप्ति समय देखें — इससे पता चलता है कि आप किस चंद्र दिवस में हैं और वह कब बदलेगा। फिर नक्षत्र देखें, क्योंकि अधिकांश मुहूर्त नियम नक्षत्र पर आधारित हैं। इसके बाद अशुभ काल देखें — राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल — इन अवधियों में नया कार्य आरंभ नहीं किया जाता।

यदि आप केवल दिन पढ़ नहीं रहे बल्कि समय चुन रहे हैं, तो चौघड़िया और होरा देखें, तथा मध्याह्न के आसपास पड़ने वाला अभिजित मुहूर्त — जो बुधवार को छोड़कर प्रायः सभी दिन शुभ माना जाता है।

पंचांग — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग किसी दिन का वैदिक पंचांग-विवरण है, जो पाँच अंगों से बनता है — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। यह बताता है कि उस दिन सूर्य और चंद्रमा वास्तव में कहाँ हैं, और पारंपरिक मुहूर्त-निर्णय इसी पर आधारित होते हैं।

अलग-अलग वेबसाइट पर पंचांग भिन्न क्यों दिखता है?

प्रायः स्थान और सूर्योदय के संदर्भ के कारण। हर अंग सूर्योदय से बँधा है और भारत में सूर्योदय का अंतर एक घंटे से अधिक है, इसलिए सूर्योदय की तिथि नगर-भेद से बदल सकती है। दूसरा कारण अयनांश का भेद होता है।

पंचांग के पाँच अंग कौन से हैं?

तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। तिथि चंद्र दिवस है, वार ग्रह-स्वामित्व वाला दिन, नक्षत्र चंद्रमा का तारा-खंड, योग सूर्य-चंद्र का संयोग, और करण आधी तिथि।

दिन के कौन से समय टालने चाहिए?

राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल — तीनों अशुभ अवधियाँ हैं, प्रत्येक दिन का आठवाँ भाग, और वार से निश्चित। यात्रा, क्रय, हस्ताक्षर, संस्कार जैसे नए आरंभ इनमें नहीं किए जाते। पहले से चल रहे कार्यों पर निषेध नहीं है।

क्या तिथि पूरे दिन एक ही रहती है?

नहीं। तिथि लगभग 19 से 26 घंटे तक चलती है, इसलिए वह प्रायः दिन के बीच समाप्त होती है। पंचांग की परंपरा है कि सूर्योदय के समय चल रही तिथि ही उस दिन की तिथि मानी जाती है।