भाद्रपद मास · भगवान गणेश एवं कृष्ण

भाद्रपद 2001 आरंभ व समाप्ति तिथि (भाद्रपद मास)

उत्तर भारत (पूर्णिमांत): रविवार, 5 अगस्त 2001रविवार, 2 सितंबर 2001

अमांत क्षेत्र: सोमवार, 20 अगस्त 2001सोमवार, 17 सितंबर 2001

गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी, हरतालिका तीज और पितृ पक्ष का पर्व-बहुल मास।

भाद्रपद 2026 देखें — इस वर्ष

भाद्रपद 2001 एक नज़र में

उत्तर भारत · पूर्णिमांत
रविवार, 5 अगस्त 2001
से रविवार, 2 सितंबर 2001 · 29 दिन
पूर्णिमा पर समाप्त होने वाला मास
अमांत क्षेत्र
सोमवार, 20 अगस्त 2001
से सोमवार, 17 सितंबर 2001 · 29 दिन
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु
उत्तर भारत · पूर्णिमांत
भाद्रपद शिवरात्रि
शनि, 18 अग॰
पूर्णिमा
रवि, 2 सित॰
अमावस्या
रवि, 19 अग॰
अमांत क्षेत्र
भाद्रपद शिवरात्रि
रवि, 16 सित॰
पूर्णिमा
रवि, 2 सित॰
अमावस्या
सोम, 17 सित॰
तिथियाँ भिन्न क्यों? पूर्णिमांत पंचांग में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अमांत में अमावस्या पर। इस कारण उत्तर भारत में भाद्रपद अमांत क्षेत्रों से लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है — यद्यपि पर्व एक ही दिन पड़ते हैं, क्योंकि वे तिथि पर आधारित हैं।

भाद्रपद का महत्व — भगवान गणेश एवं कृष्ण

भाद्रपद, वर्षा के अंत में, वर्ष के कुछ सबसे बड़े अनुष्ठान धारण करता है — जन्माष्टमी पर कृष्ण का जन्म, गणेश चतुर्थी पर गणेश की स्थापना, और अनंत चतुर्दशी पर समाप्त होने वाले दस दिन। इसका दूसरा, कृष्ण पक्ष पितृ पक्ष है, जो तर्पण और श्राद्ध द्वारा पूर्णतः पितरों को समर्पित है।

भाद्रपद के अनुष्ठान

  • गणेश स्थापना और अनंत चतुर्दशी तक दस दिन की आरती
  • जन्माष्टमी का निशीथ व्रत और अभिषेक
  • हरतालिका तीज — निर्जला शिव-पार्वती व्रत
  • पितृ पक्ष भर पितरों हेतु तर्पण और श्राद्ध
  • हरतालिका और ऋषि पंचमी व्रत
  • अनंत चतुर्दशी और अनंत सूत्र बाँधना

भाद्रपद 2001 के प्रमुख दिन

व्रत और तिथियाँ उसी मास-अवधि से निकाली जाती हैं जिसका आप पंचांग मानते हैं — इसलिए दोनों पद्धतियाँ अलग-अलग दी गई हैं।

भाद्रपद 2001 के पर्व

पूर्णिमांत मास-अवधि (रवि, 5 अग॰ – रवि, 2 सित॰) के भीतर। पर्व तिथि से तय होते हैं, इसलिए दोनों पद्धतियों में एक ही दिन पड़ते हैं।

अमांत भाद्रपद में अतिरिक्त (सोम, 20 अग॰ – सोम, 17 सित॰)

मासिक व्रत 2001

भाद्रपद 2001 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाद्रपद मास 2001 कब से शुरू है?

उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में भाद्रपद रविवार, 5 अगस्त 2001 से रविवार, 2 सितंबर 2001 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह सोमवार, 20 अगस्त 2001 से सोमवार, 17 सितंबर 2001 तक रहता है।

उत्तर और दक्षिण भारत में भाद्रपद की तिथियाँ अलग क्यों हैं?

क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।

भाद्रपद 2001 किसे समर्पित है?

भाद्रपद, वर्षा के अंत में, वर्ष के कुछ सबसे बड़े अनुष्ठान धारण करता है — जन्माष्टमी पर कृष्ण का जन्म, गणेश चतुर्थी पर गणेश की स्थापना, और अनंत चतुर्दशी पर समाप्त होने वाले दस दिन। इसका दूसरा, कृष्ण पक्ष पितृ पक्ष है, जो तर्पण और श्राद्ध द्वारा पूर्णतः पितरों को समर्पित है।

भाद्रपद शिवरात्रि 2001 कब है?

भाद्रपद शिवरात्रि 2001 — भाद्रपद मास की मासिक शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी) — उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में शनिवार, 18 अगस्त 2001 को है। अमांत क्षेत्रों में यह रविवार, 16 सितंबर 2001 को पड़ती है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक और रात्रि-पूजन का विशेष महत्व है।

भाद्रपद 2001 कब समाप्त होगा?

उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में भाद्रपद रविवार, 2 सितंबर 2001 को श्रावण पूर्णिमा पर समाप्त होता है। अमांत क्षेत्रों में यह सोमवार, 17 सितंबर 2001 को अमावस्या पर समाप्त होता है।

क्या सावन और श्रावण एक ही मास हैं?

हाँ। भाद्रपद मास इस चांद्र मास का संस्कृत नाम है और भाद्रपद उसी का प्रचलित हिन्दी रूप। दोनों एक ही अवधि बताते हैं — केवल नाम अलग है, तिथियाँ नहीं।

क्या भाद्रपद 2001 अधिक मास है?

नहीं। भाद्रपद 2001 एक सामान्य 29-दिवसीय मास है।