आषाढ़ 2080 आरंभ व समाप्ति तिथि (आषाढ़ मास)
उत्तर भारत (पूर्णिमांत): सोमवार, 3 जून 2080 – मंगलवार, 2 जुलाई 2080
अमांत क्षेत्र: मंगलवार, 18 जून 2080 – बुधवार, 17 जुलाई 2080
चातुर्मास के आरंभ का मास — जगन्नाथ रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और देवशयनी एकादशी।
आषाढ़ 2080 एक नज़र में
- पूर्णिमा
- मंगल, 2 जुल॰
- अमावस्या
- सोम, 17 जून
- आषाढ़ शिवरात्रि
- मंगल, 16 जुल॰
- पूर्णिमा
- मंगल, 2 जुल॰
- अमावस्या
- बुध, 17 जुल॰
आषाढ़ का महत्व — भगवान विष्णु
आषाढ़ वर्षा और चातुर्मास की देहरी है — वे चार मास जिनमें विष्णु शयन करते हैं, देवशयनी एकादशी से आरंभ, जब विवाह और नए कार्य रुक जाते हैं। यह पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा और गुरु पूर्णिमा धारण करता है — गुरु को समर्पित पूर्णिमा, जब व्यास पूजे जाते हैं और शिष्य मार्ग दिखाने वाले को नमन करता है।
आषाढ़ के अनुष्ठान
- देवशयनी एकादशी — चातुर्मास व्रतों का आरंभ
- पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा
- गुरु पूर्णिमा — गुरु और व्यास की पूजा
- चातुर्मास का कोई अनुशासन या व्रत धारण करना
- दीक्षितों हेतु गुप्त नवरात्रि
- योगिनी और देवशयनी एकादशी का व्रत
आषाढ़ 2080 के प्रमुख दिन
व्रत और तिथियाँ उसी मास-अवधि से निकाली जाती हैं जिसका आप पंचांग मानते हैं — इसलिए दोनों पद्धतियाँ अलग-अलग दी गई हैं।
उत्तर भारत · पूर्णिमांत
सोम, 3 जून – मंगल, 2 जुल॰ · 30 दिन
अमांत क्षेत्र
मंगल, 18 जून – बुध, 17 जुल॰ · 30 दिन
आषाढ़ 2080 के पर्व
पूर्णिमांत मास-अवधि (सोम, 3 जून – मंगल, 2 जुल॰) के भीतर। पर्व तिथि से तय होते हैं, इसलिए दोनों पद्धतियों में एक ही दिन पड़ते हैं।
मासिक व्रत 2080
आषाढ़ 2080 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आषाढ़ मास 2080 कब से शुरू है?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में आषाढ़ सोमवार, 3 जून 2080 से मंगलवार, 2 जुलाई 2080 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह मंगलवार, 18 जून 2080 से बुधवार, 17 जुलाई 2080 तक रहता है।
उत्तर और दक्षिण भारत में आषाढ़ की तिथियाँ अलग क्यों हैं?
क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।
आषाढ़ 2080 किसे समर्पित है?
आषाढ़ वर्षा और चातुर्मास की देहरी है — वे चार मास जिनमें विष्णु शयन करते हैं, देवशयनी एकादशी से आरंभ, जब विवाह और नए कार्य रुक जाते हैं। यह पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा और गुरु पूर्णिमा धारण करता है — गुरु को समर्पित पूर्णिमा, जब व्यास पूजे जाते हैं और शिष्य मार्ग दिखाने वाले को नमन करता है।
आषाढ़ 2080 कब समाप्त होगा?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में आषाढ़ मंगलवार, 2 जुलाई 2080 को श्रावण पूर्णिमा पर समाप्त होता है। अमांत क्षेत्रों में यह बुधवार, 17 जुलाई 2080 को अमावस्या पर समाप्त होता है।
क्या सावन और श्रावण एक ही मास हैं?
हाँ। आषाढ़ मास इस चांद्र मास का संस्कृत नाम है और आषाढ़ उसी का प्रचलित हिन्दी रूप। दोनों एक ही अवधि बताते हैं — केवल नाम अलग है, तिथियाँ नहीं।
क्या आषाढ़ 2080 अधिक मास है?
नहीं। आषाढ़ 2080 एक सामान्य 30-दिवसीय मास है।