आषाढ़ मास · भगवान विष्णु

आषाढ़ 2034 आरंभ व समाप्ति तिथि (आषाढ़ मास)

उत्तर भारत (पूर्णिमांत): शनिवार, 3 जून 2034सोमवार, 31 जुलाई 2034

अमांत क्षेत्र: शनिवार, 17 जून 2034सोमवार, 14 अगस्त 2034

चातुर्मास के आरंभ का मास — जगन्नाथ रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और देवशयनी एकादशी।

आषाढ़ 2026 देखें — इस वर्ष

आषाढ़ 2034 एक नज़र में

उत्तर भारत · पूर्णिमांत
शनिवार, 3 जून 2034
से सोमवार, 31 जुलाई 2034 · 59 दिन · अधिक मास
पूर्णिमा पर समाप्त होने वाला मास
अमांत क्षेत्र
शनिवार, 17 जून 2034
से सोमवार, 14 अगस्त 2034 · 59 दिन · अधिक मास
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु
उत्तर भारत · पूर्णिमांत
आषाढ़ शिवरात्रि
गुरु, 15 जून
पूर्णिमा
शनि, 1 जुल॰
अमावस्या
शुक्र, 16 जून
अमांत क्षेत्र
आषाढ़ शिवरात्रि
शुक्र, 14 जुल॰
पूर्णिमा
शनि, 1 जुल॰
अमावस्या
शनि, 15 जुल॰
तिथियाँ भिन्न क्यों? पूर्णिमांत पंचांग में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अमांत में अमावस्या पर। इस कारण उत्तर भारत में आषाढ़ अमांत क्षेत्रों से लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है — यद्यपि पर्व एक ही दिन पड़ते हैं, क्योंकि वे तिथि पर आधारित हैं।

आषाढ़ का महत्व — भगवान विष्णु

आषाढ़ वर्षा और चातुर्मास की देहरी है — वे चार मास जिनमें विष्णु शयन करते हैं, देवशयनी एकादशी से आरंभ, जब विवाह और नए कार्य रुक जाते हैं। यह पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा और गुरु पूर्णिमा धारण करता है — गुरु को समर्पित पूर्णिमा, जब व्यास पूजे जाते हैं और शिष्य मार्ग दिखाने वाले को नमन करता है।

आषाढ़ के अनुष्ठान

  • देवशयनी एकादशी — चातुर्मास व्रतों का आरंभ
  • पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा
  • गुरु पूर्णिमा — गुरु और व्यास की पूजा
  • चातुर्मास का कोई अनुशासन या व्रत धारण करना
  • दीक्षितों हेतु गुप्त नवरात्रि
  • योगिनी और देवशयनी एकादशी का व्रत

आषाढ़ 2034 के प्रमुख दिन

व्रत और तिथियाँ उसी मास-अवधि से निकाली जाती हैं जिसका आप पंचांग मानते हैं — इसलिए दोनों पद्धतियाँ अलग-अलग दी गई हैं।

आषाढ़ 2034 के पर्व

पूर्णिमांत मास-अवधि (शनि, 3 जून – सोम, 31 जुल॰) के भीतर। पर्व तिथि से तय होते हैं, इसलिए दोनों पद्धतियों में एक ही दिन पड़ते हैं।

मासिक व्रत 2034

आषाढ़ 2034 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आषाढ़ मास 2034 कब से शुरू है?

उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में आषाढ़ शनिवार, 3 जून 2034 से सोमवार, 31 जुलाई 2034 तक रहता है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यह शनिवार, 17 जून 2034 से सोमवार, 14 अगस्त 2034 तक रहता है।

उत्तर और दक्षिण भारत में आषाढ़ की तिथियाँ अलग क्यों हैं?

क्योंकि दोनों भिन्न चंद्र पंचांग का पालन करते हैं। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, अतः यह अमांत की तुलना में लगभग 15 दिन पहले आरंभ होता है। अमांत पंचांग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु) में मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है।

आषाढ़ 2034 किसे समर्पित है?

आषाढ़ वर्षा और चातुर्मास की देहरी है — वे चार मास जिनमें विष्णु शयन करते हैं, देवशयनी एकादशी से आरंभ, जब विवाह और नए कार्य रुक जाते हैं। यह पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा और गुरु पूर्णिमा धारण करता है — गुरु को समर्पित पूर्णिमा, जब व्यास पूजे जाते हैं और शिष्य मार्ग दिखाने वाले को नमन करता है।

आषाढ़ शिवरात्रि 2034 कब है?

आषाढ़ शिवरात्रि 2034 — आषाढ़ मास की मासिक शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी) — उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में गुरुवार, 15 जून 2034 को है। अमांत क्षेत्रों में यह शुक्रवार, 14 जुलाई 2034 को पड़ती है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक और रात्रि-पूजन का विशेष महत्व है।

आषाढ़ 2034 कब समाप्त होगा?

उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में आषाढ़ सोमवार, 31 जुलाई 2034 को श्रावण पूर्णिमा पर समाप्त होता है। अमांत क्षेत्रों में यह सोमवार, 14 अगस्त 2034 को अमावस्या पर समाप्त होता है।

क्या सावन और श्रावण एक ही मास हैं?

हाँ। आषाढ़ मास इस चांद्र मास का संस्कृत नाम है और आषाढ़ उसी का प्रचलित हिन्दी रूप। दोनों एक ही अवधि बताते हैं — केवल नाम अलग है, तिथियाँ नहीं।

क्या आषाढ़ 2034 अधिक मास है?

हाँ। 2034 में अधिक (मल) मास पड़ने से आषाढ़ लगभग दोगुना — 59 दिन — लंबा है।