पर्व कैलेंडर

गणेश चतुर्थी 2026: तिथि, पूजा मुहूर्त व उत्सव गाइड

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणपति स्थापना; अनंत चतुर्दशी तक दस दिन।

मंदिर की घंटियों और गेंदे के फूलों के बीच मोदक व कमल के साथ भगवान गणेश — गणेश चतुर्थी

गणेश चतुर्थी 2026एक नज़र में

गणेश चतुर्थी 2026 को है: सोमवार, 14 सितंबर 2026. अनुशंसित मध्याह्न पूजा मुहूर्त — 10:39 – 13:08.

तिथि
सोमवार, 14 सितंबर 2026
तिथि प्रारंभ
07:07 AM, सोमवार, 14 सितंबर 2026
तिथि समाप्त
07:46 AM, मंगलवार, 15 सितंबर 2026
संकल्प (सूर्योदय)
05:43
मध्याह्न पूजा मुहूर्त
10:39 – 13:08
व्रत अवधि (तिथि)
07:07 → 2026-09-15 · 07:46
पारण (तिथि समाप्ति)
07:46
मुहूर्त अवधि
2 घंटे 29 मिनट
गणेश विसर्जन (अनंत चतुर्दशी)
शुक्रवार, 25 सितंबर 2026
गणेश चतुर्थी 2026 तिथि
सोमवार, 14 सितंबर 2026
तिथि: भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी
तिथि अवधि: 07:07 AM, सोमवार, 14 सितंबर 2026 → 07:46 AM, मंगलवार, 15 सितंबर 2026
गणेश चतुर्थी 2026
आरंभ में
00दिन
:
00घंटे
:
00मिनट
:
00सेकंड

आज का पंचांग

काशी संदर्भ · तुरंत गणना
तिथि
द्वादशी
तक 06:21
नक्षत्र
उत्तर आषाढ़ा
तक 22:51
योग
आयुष्मान
करण
बालव
सूर्योदय
05:35
सूर्यास्त
18:25
चंद्र राशि
मकर
सूर्य राशि
सिंह

मुहूर्त और समय

काशी/IST · खगोलीय गणना
  • संकल्प (सूर्योदय)05:43
  • मध्याह्न पूजा मुहूर्त10:39 – 13:08
  • व्रत अवधि (तिथि)07:07 → 2026-09-15 · 07:46
  • पारण (तिथि समाप्ति)07:462026-09-15

पर्व-दिन शास्त्रीय नियमों से निर्धारित हैं — उदया, प्रदोष, निशिता, मध्याह्न या अपराह्न व्यापिनी, जैसा प्रत्येक पर्व का विधान है — काशी/वाराणसी (IST) हेतु गणना। कुछ वर्षों में क्षेत्रीय पालन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।

गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है

गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को पड़ती है और गणेश जी के जन्म का पर्व है। वे विघ्नहर्ता हैं, और विघ्नकर्ता भी — वही शक्ति, जिससे परखा जाता है कि कोई कार्य आगे बढ़ने योग्य है या नहीं। कोई अनुष्ठान, यात्रा अथवा उद्यम उनके आवाहन के बिना आरंभ नहीं होता।

पूजन मध्याह्न काल में होता है, क्योंकि गणेश जी का जन्म दोपहर में माना जाता है। प्रतिमा नियत दिनों — डेढ़, तीन, पाँच, सात अथवा दस — के लिए स्थापित की जाती है और तत्पश्चात विसर्जित। विसर्जन त्याग नहीं, अपितु सम्पूर्ण व्रत का मर्म है: जिसे पूर्ण विधि से बुलाया गया, उसे विदा भी किया जाता है, और मृत्तिका उसी जल में लौट जाती है जहाँ से आई थी।

इस रात्रि चंद्र-दर्शन वर्जित माना जाता है। उसे देखने से मिथ्या दोष — झूठा कलंक — लगता है।

गणेश चतुर्थी पूजा विधि — संक्षेप में

  1. मध्याह्न काल से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएँ।
  2. प्रतिमा को पूर्व अथवा उत्तर की ओर मुख करके स्थापित करें। जल छिड़कें और प्राणप्रतिष्ठा करें — प्रतिमा में देव का आवाहन।
  3. इक्कीस दूर्वा-दल, लाल जास्वंद, चंदन, अक्षत और कुमकुम अर्पित करें।
  4. इक्कीस मोदक अर्पित करें, अथवा जितने बन सकें। मोदक उनका भाग है; उसका कोई विकल्प नहीं।
  5. गणपति अथर्वशीर्ष अथवा संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करें, तत्पश्चात आरती।
  6. जितने दिन प्रतिमा स्थापित रहे, प्रातः और संध्या आरती करें।
  7. अंतिम दिन विदाई-पूजन करें, व्रत में हुई त्रुटियों की क्षमा माँगें, और प्रतिमा का जल में विसर्जन करें।

आवश्यक पूजा सामग्री

  • गणेश की मिट्टी की मूर्ति
  • दूर्वा (21 दलों की गड्डियों में)
  • लाल गुड़हल और पुष्प
  • मोदक — भाप के या तले
  • चंदन, कुमकुम, अक्षत
  • साबुत नारियल और केले
  • देव हेतु जनेऊ
  • पंचामृत
  • धूप, कर्पूर और दीपक
  • पान का पत्ता और सुपारी
गणेश चतुर्थी की पूजा विधि, व्रत नियम और कथा पढ़ें

गणेश चतुर्थी — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणेश चतुर्थी पर चंद्र-दर्शन क्यों वर्जित है?

चंद्रमा ने गणेश जी का उपहास किया था और शापित हुआ कि इस तिथि पर जो उसे देखेगा उस पर मिथ्या कलंक लगेगा। स्यमंतक मणि प्रसंग में स्वयं श्रीकृष्ण को यह भोगना पड़ा; उसी कथा का पाठ विहित उपाय है।

प्रतिमा कितने दिन रखनी चाहिए?

डेढ़, तीन, पाँच, सात अथवा दस दिन — सभी मान्य हैं। महत्व इसका है कि प्रतिदिन आरती हो और स्थापना के समय जो संकल्प लिया गया, उसी के अनुसार विसर्जन हो।

गणेश जी को क्या अर्पित किया जाता है?

इक्कीस दूर्वा-दल, लाल पुष्प और मोदक। मोदक उनका विशेष भोग है और उसका कोई विकल्प नहीं लिया जाता।

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